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Kya है chamki बुखार के लक्षण और कैसे करें इसका इलाज 2021

Chamki bukhar ke lakshan,karan or ilaj.



Bhopal:- Bihar में मासूमों की मौत का तांडव मचाने वाले चमकी बुखार ( Chamki Bukhar ) यानी ( Acute Encephalitis Syndrome ) को लेकर मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ( Health Department ), सरकारी और गैर सरकारी सभी अस्पतालों ( Government And Non Government Hospitals ) में सरकार ( Government ) की ओर alert रहने के निर्देश दिये जा चुके हैं।
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 हालांकि, Madhya Pradesh में अब तक इस जानलेवा बुखार ( Killer Fever ) का एक भी मामला सामने नहीं आया है, 
लेकिन इसके प्रभाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि, मध्य प्रदेश सरकार ने स्वास्थ विभाग को अलर्ट मोड ( Alert Mode ) पर कर रखा है। 
हालांकि, अब तक बिहार में जिन बच्चों का केस बिगड़ा है, उनके परिजन को इस जानलेवा चमकी बुखार के बारे में जानकारी ही नहीं थी।

 हालांकि, चमकी बुखार ( Encephalitis Fever ) को लेकर हुए अब तक के ( Analysis ) में ये बात सामने आई है कि, अगर शुरुआत में ही इसके लक्षण पहचान कर प्राथमिक उपचार शुरु कर दिया जाए, तो किसी मासूम की समय रहते जान बचाई जा सकती है।

 आज हम आपको चमकी बुखार के लक्षण ( Chamki Fever Symptoms ) और उससे सतर्क alert( Chamki Fever Awareness ) रहने के तरीके बताएंगे। आप इस जानकारी को खुद तो समझें ही, साथ ही अपने परिचितों padhosi को भी शेयर करें, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरुक( Aware )किया जा सके।


Chamki bhukhar वास्तव में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस ) है. इसे दिमागी बुखार भी कहा जाता है. 

यह इतनी भयानक और रहस्यमयी बीमारी है कि अभी तक विशेषज्ञ doctor भी इसकी सही-सही वजह का पता नहीं लगा पाए हैं.

 Chamki bhukhar में वास्तव में बच्चों के खून में सुगर sugar और सोडियम sodium की कमी हो जाती है. सही समय पर सही इलाज नहीं मिलने की वजह से जान भी जा सकती है.

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ऐसे फैलता है chamki bukhar-

इंसेफेलाइटिस बैक्टीरिया, फुंगी, परजीवी, रसायन, टॉक्सिन से भी फैलता है।

क्या है 'चमकी' बुखार chamki bhukhar-

एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम को बोलचाल की भाषा में लोग चमकी बुखार कहते हैं.

 इस संक्रमण से ग्रस्त रोगी का शरीर अचानक सख्त हो जाता है और मस्तिष्क व शरीर में ऐठंन शुरू हो जाती है. आम भाषा में इसी ऐठन को चमकी कहा जाता है. इंसेफ्लाइटिस मस्तिष्क से जुड़ी एक गंभीर समस्या है. 

दरअसल, मस्तिष्क में हजारों लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं, जिसकी वजह से शरीर के सभी अंग सुचारू रूप से काम करते हैं.लेकिन जब इन कोशिकाओं में सूजन sujanआ जाती है तो उस स्थिति को एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहा जाता है.

ये एक संक्रामक बीमारी है. इस बीमारी के वायरस शरीर में पहुंचते ही खून में शामिल होकर अपना प्रजनन शुरू कर देते हैं  ओर एक से दूसरे में फेल जाती है.

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 शरीर body में इस वायरस virus की संख्या बढ़ने पर ये खून के साथ मिलकर व्यक्ति के मस्तिष्क dimag में पहुंच जाते हैं. 
मस्तिष्क में पहुंचने पर ये वायरस virus कोशिकाओं में सूजन sujan पैदा करते हैं. जिसकी वजह से शरीर का 'सेंट्रल नर्वस सिस्टम' खराब हो जाता है.

गर्मियों में तेज धूप tej और पसीना pasinaबहने से शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इस वजह से डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर, सिरदर्द, थकान, लकवा, मिर्गी, भूख में कमी जैसे लक्षण lakshan महसूस हो सकते हैं. Chamki bhukar ke lakshan भी ऐसे ही हैं.

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यह बीमारी शरीर के मुख्य नर्वस सिस्टम या तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करती है. बहुत ज्यादा गर्मी एवं नमी के मौसम में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम के फैलने की रफ्तार बढ़ जाती है. इस मौसम में इसकी तीव्रता भी काफी बढ़ जाती है.

कैसे पड़ा इसका चमकी बुखार नाम:-


इस बीमारी में कुछ मामलों में मिर्गी के दौरे भी पड़ते हैं। इसी वजह से इसे आम बोलचाल की भाषा में chamki bukhar के नाम से भी जाना जाता है। 


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कैसे काम करते हैं चमकी बुखार के वायरस?:-


इंसेफ्लाइटिस वास्तव में मानव मस्तिष्क dimag से जुड़ी बीमारी है। हमारे मस्तिष्क में लाखों कोशिकाएं और तंत्रिकाएं होती हैं। 

इनके सहारे शरीर के अंग काम करते हैं। जब इन कोशिकाओं में सूजन sujan या कोई अन्य दिक्कत आ जाती है, तो इसे ही एक्यूट इंसेफ्लाइटिस सिंड्रोम कहते हैं। यह एक संक्रामक बीमारी है।

चमकी बुखार के कारण:-


Chamki bukhar से पीड़ित बहुत बच्चों में ग्लूकोज glucose की कमी पाई गई है। यह समझा जा रहा है कि बच्चा रात में खाली पेट सोया था। 

खाली पेट कच्ची लीची खाने से भी शुगर sugar की कमी पाई गई। कच्ची लीची में हाइपोग्लाइसीन-ए केमिकल होता है। बीज में एमसीपीजी नामक विषैला केमिकल होता है।

 बच्चे खाली पेट इसे खाते हैं तो इन दोनों के कारण उल्टी, बुखार, खून में चीनी की कमी एवं chamki bukhar के लक्षण देखे गए हैं।


 हालांकि, अब भी पूरी तरह से यह स्थापित नहीं हो पाया है कि लीची ही एईएस aes का मुख्य कारण है। 

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चमकी बुखार के लक्षण chamki bukhar ke lakshan-


1:-बच्चे के किसी अंग  में ऐंठन होना व झटके jatkeलगना।

2:-बच्चे को लगातार तेज बुखार tej bukhar होना।

3:-पूरे शरीर में दर्द pain होना।

4:-दोनों जबड़े (दांतों) को दबाए रहना।

5:-सुस्ती रहना, कमजोरी रहना।

6:-शरीर में कमजोरी kamjori होने से बेहोशी आना।

7:-शरीर के किसी भाग में दबाने या पिंच करने पर कोई गतिविधि या असर न होना।

8:-बच्चे की उल्टी ultiआने के समस्या होती है।

9:-चमकी बुखार के लक्षण chamki bukhar ke lakshan दिखाई दे तो बच्चों को तेज धूप में न जाने दें।


 10:-बुखार bukhar के साथ घबराहट gabrahat भी शुरू होती है और कई बार कोमा में जाने की स्थिति भी बन जाती है।

11:-इसके बाद शरीर sarirके तंत्रिका संबंधी कार्यों में रुकावट आने लगती है

12:-मानसिक तनाव भटकाव महसूस होता है

13:-दौरे पड़ने लगते हैं.

14:--घबराहट महसूस होने लगती है

बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल लें जाएं।

जानिए Chamki bukhar से बचाव के तरीके


1. बच्चों को जूठे व सड़े गले हुए फल सब्जी न खाने दें.

2. बच्चों को उन जगहों jagah पर न जाने दें, जहां सूअर या जानवर रहते हैं.

3.  भोजन से पहले और बाद में साबुन से हाथ जरूर धुलवाएं.

4. पीने का पानी स्वच्छ साफ-सुथरा रखें

5. बच्चों के नाखून nakhun न बढ़ने दें

6. गंदगीभरे इलाकों जगह में न जाएं

7. बच्चों को सिर्फ हेल्दी heldi खाना ही खिलाएं

8. रात dinner के खाने के बाद हल्का- फुल्का मीठा meetha खिलाएं

9. बच्चों को थोड़ी-थोड़ी देर में तरल पदार्थ देते रहें ताकि उनके शरीर में पानी pani की कमी न हो।

10.. अगर आपके बच्चे में चमकी बीमारी के लक्षण दिखें तो सबसे पहले बच्चे को धूप में जाने से रोकें।

11:-बच्चों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

12:-गर्मी में बच्चों के शरीर में पानी के कमी न होने दें इसके लिए बच्‍चों को ओआरएस (ORS) नींबू का घोल पिलाएं।

13:-रात night  में बच्‍चों को भरपेट खाना खिलाएं।

14:-बच्‍चों को दिन में 2 बार स्‍नान कराएं।

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चमकी बुखार होने पर क्‍या न करें...

बच्‍चे को खाली पेट लीची न खिलायें, आधे पके अथवा कच्‍ची लीची को खाने से बचें। बच्‍चे को कंबल अथवा गर्म कपड़ों में न लपेटें, बच्‍चे की नाक न बंद करें। बच्‍चे की गर्दन झुकाकर न रखें। मरीज के बिस्‍तर पर न बैठे साथ ही ध्‍यान रखें की मरीज के पास शोरगुल न हो।

जेई का टीका लगावाएं :-


जैपनीज इंसेफलाइटिस का टीका सरकारी अस्पतालों government hospitals में उपलब्ध है। यह मुफ्त में दिया जाता है। टीके को नौ माह से 15 साल की उम्र तक दिया जा सकता है। पहला टीका नौ से 12 महीने की उम्र में दिया जाता है। दूसरा 16 से 24 माह में पड़ता है।

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Chamki bukhar से सावधानी:-


गर्मी के मौसम में फल और खाना जल्दी खराब होता है. घरवाले family इस बात का खास jarur ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल या खराब नहीं खाए. बच्चों को गंदगी से बिल्कुल दूर रखें.

 भोजन से पहले और भोजन के बाद हाथ जरूर धुलवाएं. साफ-सुथरा पानी पिएं, बच्चों के नाखून नहीं बढ़ने दें. बच्चों children को गर्मियों के मौसम में धूप में खेलने ना दें.

रात में कुछ खाने के कुछ देर बाद ही बच्चे को सोने के लिए भेजें. डॉक्टरों की मानें तो चमकी बुखार chamki bukhar की मुख्य वजह सिर्फ लीची ही नहीं बल्कि गर्मी और उमस भी है.

बच्चे में चमकी बुखार के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल लें जाएं।

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